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किसान वैज्ञानिक


किसान  वैज्ञानिक


Posted By: Ameeta  |  Posted Date: 02-10-2025

   किसान वैज्ञानिक तात्या साहेब फड़तरे ने अपनी जीवनसाथी सरोजिनी के सहयोग से ज्वार, बाजरा, रागी जैसी उपेक्षित, शुष्क भूमि की फसलों को, सर्वहित के कार्यशैली से नई पहचान दी। उनकी कहानी, उन्हीं की जुबानी।महाराष्ट्र का पुणे इन दिनों मेरा मुख्य कार्यस्थल है, हमारे द्वारा उत्पादित और प्रसंस्कृत मोटे अनाज की बिक्री के लिए। प्रसंस्करण के लिए उद्यम बनाया है अहमदनगर जिले की राहुरी तहसील के देवलाली प्रवरा गांव में। मोटे अनाज के उत्पादन के लिए पन्द्रह एकड़ जमीन वड़ापुरी और देवलाली प्रवरा गांवों में है। अतिरिक्त उत्पाद के लिए हमसे जुड़े कईं समूह खेती करते हैं। हम प्रसंस्कृत मोटे अनाज का निर्यात भी करने लगे हैं।

यूं शुरू हुआ सफ़र

   पुणे जिले की इन्दापुर तहसील के वड़ापुरी गांव में 1978 की 23 सितम्बर को मेरा जन्म हुआ। विट्ठल के बड़े भक्त थे पिताजी रामचन्द्र। खेती के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा भी करते। मां सत्यभामा विकट आर्थिक स्थिति में 6 बहनों और 2 भाइयों को संभालती। हम सभी कृषि मजदूरी करते। स्कूल जाना नंगे पांव शुरू किया। आठवीं में पहली बार चप्पल मिली। दसवीं में स्कूल में अव्वल रहा। पिताजी डॉक्टर बनाना चाहते थे। आयुर्वेदिक कॉलेज की प्रवेश सूची में नाम भी आ गया, पर फीस कहां से भरते। पुणे के एग्रीकल्चर कॉलेज में, छात्रवृत्ति सहित प्रवेश मिल गया। रात में पार्टटाइम नौकरी करता। डिग्री मिलने से दो साल पहले पिताजी कैंसर के कारण देहमुक्त हो गए। डिग्री मिलने के बाद दोस्त के साथ नर्सरी शुरू की। फिर कृषि विद्यालय में कृषि अधिकारी की नौकरी मिली तो 2004 में सरोजिनी से शादी हो गई। सरोजिनी का साथ नहीं होता तो आज का तात्या साहेब नहीं होता। दो बेटियां श्रेया ग्यारहवीं और समृद्धि आठवीं में पढ़ रही हैं। परिवार का साथ आत्मसंबल बना। 2006 में हैदराबाद के ईटीवी का उप सम्पादक बना। दो वर्ष बाद पुणे लौट कर एक राष्ट्रीय कृषि पत्रिका में काम करने लगा। उधर, सरोजिनी ने पुणे में ज्वार, रागी और देसी गेहूं के गुणवत्तापूर्ण आटे की शुरुआत कर उसे 110 ग्राहकों तक पहुंचाया।

नौकरी नहीं, कृषि कारोबार

   नवाचारी कृषि के लिए, नौकरी को अलविदा कहकर, मोटे अनाज के उत्पादन, प्रसंस्करण और बिक्री को एकमात्र कर्मक्षेत्र बनाने की ठानी। यह भी तब जब इनका अधिक बाजार मूल्य नहीं था। यह अहसास जरूर था कि पैसा जीवन का एकमात्र सत्य नहीं है। कृषि विभाग के मिलेट अनाज पोषण सुरक्षा विकास कार्यक्रम से जुड़कर उद्यमी बन गया। वड़ापुर गांव में 10 लोगों का समूह बनाया। ज्वार, बाजरा, रागी की ग्रेडिंग के साथ प्रसंस्करण इकाई शुरू की। बिक्री का बड़ा अवसर 2012 में पुणे में ‘एग्रोवन’ प्रदर्शनी में मिला। सरोजिनी की ज्वार चकल्या, शंकरपाल्या, ज्वार इडली की रेसिपी को लोगों ने खूब पसंद किया। फिर प्रदर्शनियों, दुकानों आदि पर बिक्री का सिलसिला शुरू हुआ। होम डिलिवरी का काम रंग लाया। इडली मिक्स और रेडी मिक्स उत्पादों ने पुणे के बाहर भी धूम मचा दी।

आधुनिक स्वरूप

    2013 से प्रसंस्करण कार्य के आधुनिकीकरण के लिए, बैंकों से लेकर अपनों तक पैसे जुटाने के लिए हाथ पैर मारे। अब जैसे तैसे आधुनिक मशीनरी वाली स्वचालित प्रसंस्करण इकाई पूर्ण क्षमता से उत्पादन कर रही है। 61 लाख की लागत से बनी इस इकाई में 27 उत्पाद बनते हैं। इनकी महाराष्ट्र ही नहीं, अन्य प्रदेशों से लेकर विदेश तक मांग है। विनिता पलांड़े का बेटा नीदरलैंड में है। 2017 में उनको 200 से 300 बॉक्स बाजरा उत्पाद निर्यात किए। अब हमारे उत्पादों को आधा दर्जन से अधिक देशों को भेजते हैं। महाराष्ट्र पोषण सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से, स्कूलों में मध्याह्न भोजन के रूप में पौष्टिक ज्वार का उपयोग होता है। 2023 में सारी दुनिया में मोटा अनाज का महत्व बहुत बढ़ा, अन्तर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के कारण।

सामूहिक खेती

   मोटा अनाज की सामूहिक खेती, हमने 10 लोगों के समूह से शुरू की थी। अब यह 650 किसानों तक पहुंच चुकी है। इनकी 85 हेक्टेयर जमीन पर अब जैविक खेती होने लगी है। हमें मौके पर ही बाजार मूल्य से 10-15 फीसदी अधिक भाव मिल जाते हैं। 2023 में अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के कारण हमारा सालाना टर्न ओवर ढाई करोड़ रुपये से अधिक रहा। कुछ रागी, ज्वार, बाजरा पफ्स उत्पाद भी इस अवधि में और जोड़े। बहुराष्ट्रीय सहित 14 कंपनियों को हम मोटा अनाज उत्पादों की आपूर्ति करने लगे हैं। लघुकाय कोशिश अब रफ्तार पकड़ने लगी है। विस्तार के नए क्षितिज चिह्नित होने लगे हैं। हमारा ‘गुड 2 ईट’ ब्रैंड विश्वसनीयता का पर्याय बन गया है। इस कारण निरन्तर नए नेटवर्क जुड़ रहे हैं।  

सम्मान और पुरस्कार

  • 2013 : भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद द्वारा सर्वश्रेष्ठ उद्यमी सम्मान
  • 2015 : डी मीडिया रूट्स, पुणे द्वारा कृषि सम्मान पुरस्कार
  • 2016 : दूरदर्शन, मुम्बई के सह्याद्री का कृषि सम्मान पुरस्कार
  • 2017 : आईआईएमआर, हैदराबाद द्वारा महाराष्ट्र में सर्वश्रेष्ठ मिलेट स्टार्टअप सम्मान, न्यूज
  • 2018 : लोकमत द्वारा बलिराजा सम्मान
  • 2019 : एग्रोवन, पुणे द्वारा एग्रोवन स्मार्ट कृषि उद्योगक सम्मान
  • 2022: महाराष्ट्र का सर्वश्रेष्ठ मिलेट स्टार्टअप सम्मान
  • 2023 : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा सर्वश्रेष्ठ मिलेट पुरस्कार, आईआईएमआर हैदराबाद द्वारा पोषक अनाज राष्ट्रीय पुरस्कार

सम्पर्क:  

तात्या साहेब फड़तरे, समृद्धि एग्रो ग्रुप, 554, गांव वड़ापुरी, तहसील इन्दापुर-413106, जिला पुणे (महाराष्ट्र), प्रसंस्करण इकाई: गांव देवलाली प्रवरा, तहसील राहुरी-413716, जिला अहमद नगर ( महाराष्ट्र), मोबाइल: 9404327853   

ईमेल : samruddhiagro12@gmail.com

वेबसाइट : www.gud2eat.in


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